जोधपुर हाईकोर्ट ने 22 गांवो के जनता कि सुनी पुकार,
कृष्णावती नदी के खनन को लेकर हाइकोर्ट ने दिया स्टे,
जावाल, बरलूट सहित आसपास के गांवो कि जनता मे ख़ुशी का माहौल
सिरोही ( लियाकत मनसूरी ) 13 अगस्त । जावाल बरलूट गाँव के बीच स्तिथ कृष्णावती नदी मे बजरी रॉयल्टी वालो के द्वारा नियमो को ताक मे रखकर नदी से किए जा रहे बजरी खनन के विरोध मे 22 गांवो कि जनता ने पूर्व मे धरना प्रदर्शन किया था। इसके साथ ही कृष्णावती संघर्ष समिति के सदस्यों ने जोधपुर हाईकोर्ट मे याचिका लगाई थी जिस पर अब उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कुलदीप माथुर ने कृष्णावती नदी के खनन पर स्टे लगा दिया है। जिससे जावाल सहित आसपास के 22 गांवो कि जनता मे ख़ुशी कि लहर देखी जा रही है।
कृष्णावती नदी संघर्ष समिति के बैनर तले जावाल सहित आस-पास के 22 गांवो कि जनता ने मिलकर लगभग 11 महीने पूर्व कृष्णावती नदी में नियमो को ताक मे रखकर बजरी खनन हो रहा था उसको रोकने के लिए धरना प्रदर्शन किया था। दो दिन पूरा बाज़ार बंद रहा था। फिर उसके बाद में प्रशासन का आश्वासन मिलने के बाद धरना समाप्त कर दिया था। लेकिन वापस पुनः नदी मे बजरी खनन चालू होने पर लगभग 4 महीने पहले एक बार फिर कृष्णावती नदी बचाओ आंदोलन को कृष्णावती नदी संघर्ष समिति के बैनर तले जावाल सहित आस-पास के 22 गांवो कि जनता के द्वारा एकजुट होकर धरना प्रदर्शन शुरू किया गया और उस प्रदर्शन में करीब 5 दिनों तक लगभग 22 गांवों के बाज़ार बंद रहे।
ओर संघर्ष समिति के नारायण लाल सुथार ओर दिनेश सिंह देवड़ा ने आमरण अनशन शुरू किया ओर दो दिन का अनशन भी पूरा हुआ। वही अनशन के तीसरे दिन कि गंभीरता को देखते हुए राज्यमंत्री ओटाराम देवासी व सांसद लुम्बाराम चौधरी मौके पर पहुंचे ओर आमरण अनशन को खुलवाया तुड़वाया उसके बाद में जांच होने तक खनन को अस्थाई रोक दिया था। इस दौरान संघर्ष समिति के सदस्यों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दर्ज की थी और उस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कुलदीप माथुर द्वारा स्टे जारी कर दिया है। और कृष्णावती नदी खनन के मामले मे हाईकोर्ट से स्टे आने के बाद जावाल सहित आसपास के 22 गाँव के लोगो मे ख़ुशी का माहौल भी दिखाई दे रहे है।
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